Skip to main content

अमरीका आर्थिक के अलावा सामाजिक

अमरीका आर्थिक के अलावा सामाजिक तौर पर भी महान देश क्यों है,

उसे जानने के लिए वर्तमान के "जॉर्ज फलोयड" आन्दोलन पर हमे नजर डालनी चाहिए, जिसमे "अश्वेत व्यक्ति" की श्वेत पुलिस अधिकारी द्वारा हत्या करने पर वंहा के "श्वेत लोग" पुलिस अधिकारी को बचाने की जगह उसे "कड़ी सजा" देने के लिए प्रदर्शन कर रहे है. 

लॉकडाउन के बीच अमरीका में एक आन्दोलन ने कई शहरो को जद में ले लिया है, यह आन्दोलन इस कद्र तक बढ़ गया है की डोनाल्ड ट्रम्प की अपील पर पेंटागन ने सेना को हिदायत दी है की वो चार घंटे के शोर्ट नोटिस पर स्तिथि पर काबू करने के लिए पोजीशन लेने के लिए तैयार रहे। 

1.आंदोलन का विषय
   ****************
इस आन्दोलन का विषय एक अश्वेत अथार्त काले व्यक्ति "जोर्ज लोयड" की हत्या से शुरू हुआ. जिसमे अम्रीका के मिनेपौलिस शहर में फर्जी बिल के मामले में एक अश्वेत व्यक्ति को पुलिस अधिकारी डेरेक शाविन जो की श्वेत था, ने पकड़ा और सडक पर ही उसकी गर्दन पर अपने पैर को रख दिया जिससे उस अश्वेत व्यक्ति की सांसे उखड़ने लगी, इस पुलिस अधिकारी ने पुरे 9 मिनट तक अपने पैर को उसकी गर्दन पर रखा. इसके बाद आसपास खड़े लोगो ने पुलिस अधिकारी से छोड़ने की गुहार लगाई, इसके अलावा पीड़ित अश्वेत जॉर्ज फ्लॉयड ने भी बार कहा की में मुझे छोड़ दीजिये, "में सांस नही ले पा रहा हूँ". 

उसके बाद भी पुलिस अधिकारी डेरेक साविन ने उसे नही छोड़ा. जिसके बाद "में सांस नही ले पा रहा हूँ" जोर्ज के आखरी शब्द बन गये और वर्तमान के प्रदर्शन का भी यह मुख्य स्लोगन बन गया है. 

2. इस दौरान राह चलते हुए किसी राहगीर ने इसकी विडिओ बना ली और अपलोड कर दी, जिसके बाद पुरे आमरीका में उबाल आ गया है. प्रदर्शन हिंसक हो चुके है. कई दुकाने लुट ली गयी है. हिंसा में एक युवक की गोली लगने से मौत हो गयी है. 

3.विशेष बात
**********
इस आन्दोलन की विशेष बात यह है की इस आन्दोलन में बढ़ चढकर "श्वेत लोग " हिस्सा ले रहे है. वो जॉर्ज फ्लॉयड को न्याय दिलवाने के लिए सडको पर है. आन्दोलन कर रहे है. "अश्वेत लोगो" के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आन्दोलन का हिस्सा बन रहे है. बल्कि स्वय आन्दोलन की अगुआई तक कर रहे है. 

4.प्रश्न :क्या ऐसा भारत मे होता है?.
***************************

अब प्रश्न यह है की क्या यह भारत में हो सकता है?. क्या भारत में एससी/एसटी के साथ जो रोजाना "जॉर्ज फ्लॉयड" जैसी घटनाये होती है, उसमे गैर एससी/एसटी इस प्रकार के आन्दोलन का हिस्सा बन सकते है. 

उत्तर:
*****
इस बारे में सोचना भी गलत है. क्युकी वो आन्दोलन का हिस्सा बनने की जगह आरोपी को बचाने के लिए हर तरह की कोशिस करेंगे, सरकार से लेकर प्रशासन तक पर दवाब डालेंगे. आन्दोलन खत्म करने के लिए अपने बंदे भेजकर हिंसक आन्दोलन में तब्दील करवा देंगे. मुख्य मुद्दा ही खत्म हो जाएगा। और जो एक दो ब्राह्मण, छत्रिय, वैश्य में समानता के लक्षण होने के कारण आंदोलन का हिस्सा बनेंगे, उन्हें भी टारगेट कर दिया जाएगा.

Comments

Popular posts from this blog

अशोक चक्र " का जब issue उठा तब।

 🇮🇳"अशोक चक्र " के लिए बाबासाहब ने बहुत Struggle किया है। .. " अशोक चक्र " का जब issue उठा तब। पूरी Parliament में हंगामा शुरू था। .. पूरी Parliament दनदना गयी थी।..   पहले राष्ट्रध्वज का कलर बनाने के लिए बाबासाहब ने " पेंगाली वेंकैय्या " को चुना था। ...पेंगाली वेंकैय्या को कलर के बारे में जनाकारी थी। ... उनका संवैधानिक चयन बाबासाहब ने किया था। ,.. पेंगाली वेंकैय्या ने ध्वज का कलर तो बनाया लेकिन वो कलर ऊपर निचे थे ... मतलब सफ़ेद रंग सबके ऊपर , फिर ऑरेंज और फिर हरा। ...  बाबासाहब ने सोचा , अगर अशोक चक्र हम रखे तो वो नीले रंग में होना चाहिए , और झंडे के बिच में होना चाहिए  ... ऑरेंज रंग पे " अशोक चक्र " इतना खुल के नहीं दिखेगा। ... बाबासाहब ने सोचा , अगर सफ़ेद रंग को बिच में रखा जाए जो की शांति का प्रतिक है , उसपर अशोक चक्र खुल के भी दिखेगा। .. और शांति के प्रतिक सफ़ेद रंग पे बुद्ध के शांति सन्देश का अशोक चक्र उसका मतलब बहुत गहरा होगा। ...  इसलिए बाबासाहब ने वो कलर ठीक से सेट किये। .. और सफ़ेद रंग बिच में रखा ताकि उसके ऊपर " अशोक चक्र  रखा जाए। ...

साइमन कमीशन पर एक सच्चाई जो हमारे सामने गलत रूप से पेश की गई!

 साइमन कमीशन पर एक सच्चाई जो हमारे सामने गलत रूप से पेश की गई!                                            भारत में आज तक ये ही पढ़ाया गया था, कि गांधी ने साइमन कमीशन का विरोध किया!  लेकिन ये नहीं पढ़ाया जाता कि तीन शख्स थे जिन्होंने साइमन कमीशन का स्वागत किया!   इन तीनो शख्सो के नाम निम्न है - 1- सर छोटूराम जी, जो पंजाब से थे 2- एससी से डॉक्टर बाबा सहाब अम्बेडकर जी, जो महाराष्ट्र से थे! 3- ओबीसी से शिव दयाल चौरसिया जी, जो यूपी से थे!    अब सवाल ये उठता है कि गांधी ने साइमन का विरोध क्यों किया?  क्योंकि 1917 में अंग्रेजो ने एक एक कमेटी का गठन किया था, जिसका नाम था साउथ बरो कमिशन!  जो कि भारत के शूद्र अति शूद्र अर्थात आज की भाषा में एससी एसटी और ओबीसी के लोगों की पहचान कर उन्हें हर क्षेत्र में अलग अलग प्रतिनिधित्व दिया जाए और हजारों सालों से वंचित इन 85% लोगों को हक अधिकार देने के लिए बनाया गया था!  उस समय ओबीसी की तरफ से शाहू महाराज ने भास्...

Babu gautam

Babu gautam Bheem Army Club 📘